वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः
शैक्षिक मंथन का प्रस्तुत अंक ‘शिक्षा के लिए शिक्षक’ विषय पर केंद्रित है। इसमें लेखकों द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश और
Read Moreसंपादकीय
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Read Moreभारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में शिक्षा की भूमिका और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है जहाँ अनेक भाषाएँ, उप-संस्कृतियाँ,
Read Moreभारतीय सनातन काल गणना की संकल्पना विश्व की उत्पत्ति और अवसान के विभिन्न चक्रों मन्वंतरों के लाखों वर्षों की गणना
Read Moreश्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है ‘न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते’ अर्थात् ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है।
Read Moreभारतीय स्वाधीनता आंदोलन, भारत की राष्ट्रीय एकात्मता तथा भारत को वंदनीय मातृ-देवी के रूप में स्थापित करने वाले अमरगीत ‘वंदे
Read Moreभारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2025 को ‘विकसितभारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 बिल संख्या – 194’ संसद में
Read Moreएक – भारत में प्राचीनकाल से ही खेलों की एक समृद्ध परंपरा रही है। भारत के वैदिककालीन खेल भारतीय सभ्यता
Read Moreप्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में शिक्षा प्रा को ही ‘विद्या’ कहा जाता था। तब शिक्षा ज्ञान और अनुभव के सम्मिश्रण
Read Moreशक्षिक मंथन का यह अंक भारत सरकार : 2047′ उद्देश्यक महत्वाकांक्षी परियोजना पर केंद्रित है । सन् 2047 भारत की
Read Moreराष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनेक सकारात्मक एवं क्रांतिकारी परिणाम दिखाई देते हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्व रैंकिंग में
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