वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः
शैक्षिक मंथन का प्रस्तुत अंक ‘शिक्षा के लिए शिक्षक’ विषय पर केंद्रित है। इसमें लेखकों द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश और
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Read Moreभारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में शिक्षा की भूमिका और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है जहाँ अनेक भाषाएँ, उप-संस्कृतियाँ,
Read Moreभारतीय सनातन काल गणना की संकल्पना विश्व की उत्पत्ति और अवसान के विभिन्न चक्रों मन्वंतरों के लाखों वर्षों की गणना
Read Moreश्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है ‘न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते’ अर्थात् ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है।
Read Moreभारतीय स्वाधीनता आंदोलन, भारत की राष्ट्रीय एकात्मता तथा भारत को वंदनीय मातृ-देवी के रूप में स्थापित करने वाले अमरगीत ‘वंदे
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